जीवन की डाटा एंट्री

बेरोजगार रोहित को बहुराष्ट्रीय कंपनी का करार मिलने के बाद उस के परिवार में खुशियां लौट आईं किंतु यह खुशियां ज्यादा दिन तक नहीं टिक सकीं, एक बार फिर उस के जीवन की डाटा एंट्री में विराम लग गया। पितापुत्र दोनों डेल्टा इन्फोसिस के कार्यालय की शानोशौकत से प्रभावित बैठे थे। यू आकार के काउंटर के पीछे 2 लड़के व 1 लड़की मुस्तैदी से काम कर रहे थे। दाईं तरफ बने एक केबिन को देख कर अनंत देसाई ने सोचा इस में जरूर डायरेक्टर नीलेश याज्ञनिक बैठे होंगे। रिसेप्शन के गुदगुदे सोफे पर पहलू बदलते हुए अनंत देसाई ने धीमे से बेटे से कहा, आफिस तो अच्छा है। रोहित ने सिर हिला कर समर्थन किया। थोड़ी देर में चपरासी ने झुक कर कहा, आप लोगों को सर बुला रहे हैं। उन के अंदर आते ही नीलेश बड़ी गर्मजोशी से उन का स्वागत किया और दोनों से हाथ मिलाया। अनंत देसाई ने सीधे ही बता दिया, देखिए, डाटा एंट्री के बारे में मैं थोड़ाबहुत जानता हूं। मैं अपने बेटे के लिए कोई काम ढूंढ़ रहा हूं। आप ने जो विज्ञापन दिया था उस के बारे में विस्तार से बताइए। जरूर नफासत से कंधे उचकाते हुए नीलेश ने कहना शुरू किया, आजकल विदेशों में बड़े होटलों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों के पास समय नहीं है इसलिए वे अपनी स्केन फाइल के दस्तावेज बनवाने के लिए हमारे पास भेजते हैं। आप ने शायद ओबलौग इ लाइब्रेरी का नाम सुना होगा? नीलेश ने सीधे ही उन की आंखों में देख कर पूछा।

न जानते हुए भी उन के मुंह से हां निकला तो नीलेश ने कहा, बस, वही हमारे सब से बड़े क्लाइंट हैं। आप का यह पहला आफिस है? नहीं, हमारे मुंबई और दिल्ली में भी आफिस हैं। वहां की प्रगति देख कर मैं ने सोचा कि एक आफिस यहां भी खोला जाए। मेरा बेटा डाटा एंट्री का काम करना चाहता है। इस के लिए मुझे क्या करना होगा? डाटा एंट्री करने वाले कंप्यूटर आपरेटर कहलाते हैं। इन से हम 2,500 रुपए सिक्योरिटी मनी के रूप में लेते हैं। वे यह काम घर बैठ कर भी कर सकते हैं। जी, इस काम से आगे क्या उम्मीद की जा सकती है? अजी साहब, अभीअभी तो यह काम शुरू हुआ है पर जो विदेशी कंपनियां भारत को काम दे रही हैं वे यहां के प्रतिभावान लोगों को अपने देश में भी बुला सकती हैं। पहले काल सेंटर व ट्रांसक्रिप्शन का ऐसा ही शोर मचा था। कुछ काल सेंटर तो बंद भी हो गए। उन के प्रबंधक नाकाबिल रहे होंगे। बड़े शहरों में तो अभी भी धड़ल्ले से काल सेंटर चल रहे हैं। मुझे कोई जल्दी नहीं है, आप सोच लीजिए। वैसे मेरे पास इतना काम है कि मैं 400 लोगों को काम दे सकता हूं। अनंत देसाई ने फौरन कहा, मैं 2,500 रुपए अभी देना चाहता हूं। धन्यवाद, आप इस काम की पूरी जानकारी यहां के मैनेजर सोमी से ले लीजिए और उन्हीं के पास रुपए जमा कर दीजिए। केबिन से बाहर आ कर उन्होंने देखा बाईं तरफ लकड़ी के केबिन के बाहर नेमप्लेट लगी थी सोमी। देसाई और रोहित कुरसियां खींच कर सोमी के सामने बैठ गए। देसाई ने उन से कहा, मैं अपने बेटे रोहित की सिक्योरिटी फीस देना चाहता हूं पर उस से पहले मैं यह शंका दूर करना चाहता हूं कि जो लोग यह काम करेंगे उन्हें पैसा किस हिसाब से मिलेगा। देखिए, बहुराष्ट्रीय कंपनी हमें किसी फर्म की स्केन फाइल भेजती है। मान लीजिए उस में देख कर कोई आपरेटर 1 हजार करेक्टर यानी लैटर्स टाइप करता है तो हम उसे एक शब्द मान कर पेमेंट करेंगे। अभी यह कंपनी नई है इसलिए एक शब्द के लिए 6 रुपए देगी पर बाद में यह पैसा बढ़ा कर 20 रुपए प्रति शब्द कर देगी। यह काम तो अमेरिका में भी हो सकता था। हां, हो तो सकता था किंतु वहां महंगा बहुत है। वहां उन्हें प्रति शब्द 2 डालर यानी कि 90 रुपए देने होते हैं। भारत में कमीशन देने के बाद भी उन्हें यह सस्ता पड़ता है और हां, साइज के हिसाब से भी टाइपिंग पेमेंट होगी। अनंत देसाई प्रभावित हो गए और तुरंत ही रोहित का सिक्योरिटी फार्म भरकर 2,500 रुपए जमा कर दिए। 10 रुपए के स्टांप पेपर पर मैनेजर ने अपने व याज्ञनिक के हस्ताक्षर करवा कर उन्हें दे दिए। उस दिन अपने आफिस के काम में देसाई का मन नहीं लग रहा था। इस समय कंप्यूटर खरीदने की बात तो सोची भी नहीं जा सकती थी क्योंकि साल के अंदर ही शिखा की शादी करनी थी लेकिन अब तो कंप्यूटर खरीदना ही है, चाहे किसी भी हालत में। रोहित के चेहरे की हताशा को किसी तरह पोंछना ही होगा। जब से उन्होंने एक बेरोजगार युवक की आत्महत्या की बात पढ़ ली थी तब से दिल में एक डर सा बैठ गया था। घर की दशा को देखते हुए रोहित उन्हें बारबार समझा चुका था कि कोई पुराना कंप्यूप्टर ले लेना चाहिए लेकिन वह जिद पर अड़े थे कि बहुराष्ट्रीय कंपनी का मामला है, हर चीज उसी के स्तर की होनी चाहिए। कंप्यूटर आते ही जैसे रोहित की ज्ंिदगी में पंख निकल आए थे। वह 5-6 घंटे बैठ कर टाइप करता और जैसे ही काम पूरा होता वह दस्तावेज डेल्टा इन्फोसिस प्रा।लि। को दे आता। सोमी उसे तुरंत ही भुगतान कर देते। याज्ञनिक तो अकसर टूर पर बाहर रहते थे। 2 माह में ही रोहित ने अच्छीखासी रकम कमा ली। तब घर के कोनेकोने में जैसे खुशी की तरंगें मचलने लगी थीं। रोहित की मां बेटे की टाइपिंग का मुसकराता चेहरा देख कर वह खिल जाते थे। इसी सपने को पूरा करने के लिए वह याज्ञनिक से मिलना चाहते थे लेकिन अनेक शहरों में फैले काम की वजह से उन का यहां आना कम होता था। सोमी से उन्होंने कह रखा था कि जैसे ही याज्ञनिक साहब आफिस आएं उन्हें तुरंत खबर करें। याज्ञनिक के शहर में आने की खबर पाते ही वह एक किलो मिठाई का डब्बा ले कर उन से मिलने चल दिए। मिठाई का डब्बा थोड़ी आनाकानी के बाद लेते हुए याज्ञनिक मुसकराए, देसाईजी, इस की क्या जरूरत थी? साहब, यह मिठाई मैं नहीं एक पिता दे रहा है। आप ने मेरे बेटे के चेहरे की हंसी वापस लौटा दी है। वह आप के यहां का काम करते हुए प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा है। बहुत खूब, इस शहर के डाटा आपरेटरों में वही सब से होनहार है। रियली, कहते हुए देसाई की आंखों में सुदूर देश के किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी के आफिस में लगी हुई बेटे की नेमप्लेट कौंध गई। तभी नीलेश याज्ञनिक के मोबाइल की घंटी बज उठी। मोबाइल पर क्या बातें हुईं यह अनंत देसाई की समझ में नहीं आया लेकिन नीलेश के चेहरे की खुशी देख कर वह यह तो समझ गए कि कोई अच्छी खबर है। मोबाइल का स्विच बंद करते ही उन्होंने बेहद गर्मजोशी से देसाई से हाथ मिलाया और उत्साह से कहा, देसाई, आप की यह मिठाई मेरे लिए शुभ समाचार लाई है। वह कैसे?

अभी बताता हूं, यह कह कर नीलेश ने घंटी दबा दी। कुछ पल बाद ही चपरासी आ कर खड़ा हो गया तो वह बोले, गोपीराम, भाग कर आफिस में सभी के लिए बटरस्काच आइस्क्रीम लाओ। ऐसी भी क्या खुशखबरी है जी? अनंत देसाई ने पूछा। यों समझिए कि एक माह से रुका पड़ा साढ़े 12 करोड़ रुपए का भुगतान हो गया है। इस पैसे के कारण दिल्ली और मुंबई के आपरेटरों का पेमेंट रुका हुआ था। कितना बुरा लगता है जब हमारे आपरेटर काम करते हैं और हम समय से उन्हें भुगतान नहीं दे पाते। अब मैं उन्हें भुगतान दे सकता हूं। तीसरे दिन ही नीलेश ने आपरेटरों की एक मीटिंग रखी, मैं सोच रहा हूं कि काम इतना बढ़ रहा है कि हर 3 दिन बाद आप लोगों को भुगतान करने में सोमी साहब परेशान हो जाते हैं तो क्यों न आप लोगों के काम के हिसाब से 15 या 30 दिन में भुगतान कर दिया करें। अब इस कंपनी का अकाउंट यहां केलोटस बैंक में है। आप चाहें तो इस की जांच कर लें। हम अब चेक से भुगतान करेंगे। अब आप लोग निर्णय लें कि आप 15 दिन भुगतान चाहते हैं या एक माह बाद? आपरेटरों ने आपस में विचार कर 15 दिन बाद भुगतान लेने की बात पर सहमति जता दी। अगले माह के दोनों चेकों का बैंक ने भुगतान किया लेकिन उस के बाद के चेक बाउंस होने लगे। जब शोर मचने लगा तो सोमी ने समझाया, हम इतना बड़ा आफिस ले कर बैठे हैं। कहीं भाग जाने वाले नहीं हैं? लीजिए, आप लोग याज्ञनिक सर से बात कर लीजिए। सोमी ने तुरंत ही उन के मोबाइल का नंबर डायल किया और उन से बात कर के बोले, सर, कह रहे हैं कि रोहित को फोन दो। रोहित ने फोन पर कहा, सर, हमारे चेक बाउंस हो रहे हैं। देखो, एक बैंक की एल।सी। में कुछ स्पेल्ंिग की गलती है, उसे वापस भेजा है। जब दूसरी एल।सी। आएगी तब पैसा जमा होगा, तब आप लोगों का भुगतान हो जाएगा। सिक्योरिटी के लिए आप चेक लेते जाइए। एकसाथ भुगतान हो जाएगा। ओ, थैंक्स, सर, आप ने हमारा संदेह दूर कर दिया। रोहित ने अपने साथियों को इस बातचीत के बारे में बताया। खैर, पेमेंट कहां जाएगा, एक दादा टाइप लड़के ने कहा, यदि पेमेंट नहीं दिया तो इस आफिस का फर्नीचर बेच कर अपना पैसा ले लेंगे। इस तरह 3 महीने बीत गए। सभी आपरेटरों का गुस्सा सीमा पार करने लगा। अपने सामने मुसीबत खड़ी देख सोमी ने मोबाइल पर नीलेश और रोहित के बीच बात करा दी। आप की एल।सी। पता नहीं कब जमा होगी। अब कोई आपरेटर इंतजार करने के लिए तैयार नहीं है, रोहित जोर से चिल्लाया। तभी दादा टाइप उस लड़के ने रोहित के हाथ से फोन छीन लिया और दहाड़ा, सर, यदि कल तक हमें पेमेंट नहीं मिली तो हम सब आप के आफिस का सामान बेच कर अपना पैसा वसूल करेंगे। ओ भाई, ऐसा मत करना, नीलेश का स्वर हड़बड़ा गया, चलो, मैं किसी भी तरह पैसे का इंतजाम कर के सुबह 10 बजे आफिस पहुंच रहा हूं। आप सब लोग भी आ जाइए। दूसरे दिन सुबह का समाचारपत्र पढ़ कर 400 परिवार सन्न रह गए। हर समाचारपत्र का एक ही मजमून था कि प्रदेश के सब से बड़े डाटा एंट्री का भंडाफोड़ङ्घसाथ में था पुलिस वालों के बीच मुंह लटकाए सोमी का फोटो। अनंत देसाई ने धड़कते दिल से खबर पढ़ी, सोमी गिरफ्तार लेकिन नीलेश याज्ञनिक तमाम आपरेटरों की जमा सिक्योरिटी ले कर और उन से मुμत में काम करा के 15 करोड़ रुपए का फायदा उठा कर फरार। उस दादा टाइप लड़के ने अखबार पढ़ कर सोचा आफिस को फर्नीचर सहित आग लगा आए लेकिन आगे पढ़ कर वह सन्न रह गया क्योंकि आगे लिखा था कि आफिस व फर्नीचर नीलेश याज्ञनिक ने किराए पर ले रखा था। उधर सोमी की मां बेटे की गिरफ्तारी से बेहोशी में थी। उन्हें जैसे ही होश आता चिल्लातीं, सोमी, मैं ने पहले ही मना किया था कि तू इस कंपनी का मालिक मत बन। कोई वैसे ही लाखों रुपए का आफिस किसी के नाम नहीं करता। और रोहित? वह अपने को संभालने की कोशिश कर रहा था। धीरेधीरे फिर वह अपने कमरे में बंद रहने लगा। ?